गोहद का किला, भिण्ड, मध्यप्रदेश



























































































































गोहद का किला, भिण्ड, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में गोहद का किला भिण्ड जिले के गोहद तहसील में स्थित है। ग्वालियर से लगभग 35 किमी दूर तथा भिण्ड से 45 किमी की दूरी पर है। किले में पहुंचने के लिए राष्टीय राजमार्ग 92 से गोहद चैराहा से होकर सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। गोहद चैराहा से किला लगभग 5 किमी की दूरी पर होगा।
किला दो भागों में है। पुराने किला में किले के सामने नया-महल स्थित है। पुराने किले में नया-महल के बीच में किले में प्रवेश के लिए पत्थर एवं ईंटों का मार्ग बनाया गया है।
किला बेसली नदी के किनारे उंचाई पर स्थित है, जो कि राजपूत और जाट स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
किले के निर्माण में ईंट-पत्थर, मिटटी और चूने का उपयोग किया गया है। किले की दीवालों पर सफेद पत्थर, चूना, गुड़, उड़द, बजरी, कौड़ी, सनबीजा, गोंद आदि को पीसकर तैयार किए गए सफेद एवं भूरा प्लास्टर किया गया है और उक्त चूने के प्लास्टर में मछली, भेड़, कुत्ते, तोता, हिरण, बृक्ष, कमल के फूल, हंस, हाथी, फूलपत्तियां आदि से दीवाल पर ईरानी शैली में नक्काशी की गई हैं,  जो आज भी दर्शनीय स्थिति में है।
पुराने किले में रानीमहल, राजामहल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, पूजाघर, नृत्यघर और अखाड़ा, स्नानगार, कुआं आदि किले के भाग पर जोकि वर्तमान में क्षतिग्रस्त स्थिति में है। अखाड़ा के बीच में गोल स्थान जिसमें आपस में पहलवान लोग लड़ते थे और सामने राजा के बैठने का स्थान है तथा अन्य चारों तरफ लोगों के बैठने का स्थान बने हुए है, जो आज भी दर्शनीय है।
किले का निर्माण 1739 ई. में जाट राजा भीमसिंह द्वारा कराया गया था। नया-महल का निर्माण जाट राजा छत्रपति सिंह द्वारा बाद में कराया गया है। जिसमें वर्तमान में तहसील न्यायालय, कोषालय आदि शासकीय भवन लगते हैं।
नया-महल की सम्पूर्ण अंदर की दीवालों पर तथा मुख्य द्वार पर सफेद पत्थर एवं चूने का सुंदर प्लास्टर किया जाकर उक्त प्लास्टर पर ईरानी शैली में नक्काशी से पेड़-पौधे, पत्तियां आदि बनाए जाकर उत्कृष्ट नक्काशी की गई हैं। नया-महल के खिड़कियां पत्थरों की नक्काशी करके बनाई गई हैं। नया-महल की नक्काशी आज भी दर्शनीय स्थिति में है।
मध्यभारत में गोहद के किले का अत्यधिक सामारिक महत्व रहा है। किले पर जाट राजाओं एवं भदावर राजाओं और मराठाओं का आधिपत्य रहा है।
वर्तमान में पुराना किला  एवं नयामहल म0प्र0 सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है और पुरातत्व विभाग द्वारा साफ-सफाई तथा मरम्मत का कार्य कराया जाता है। नयामहल में शासकीय आॅफीसों को हटाए जाकर नयामहल का भी पुरातत्व दृष्टि से संरक्षण किए जाने का प्रस्ताव भी है।

योगेश कुमार गुप्ता

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

धामोनी का किला सागर

भारत में न्याय की देवी और धर्म का देवता-