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AVANTISVAMIN TEMPLE , srinagar

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AVANTISVAMIN TEMPLE AVANTIPUR                         Avantipur (Lat. 33°55' N; Long. 75°00' E) is situated at a distance of 29 km southeast on the Srinagar – Anantnag road located at the foot of one of the spurs of mountain namely Wastarwan. It overlooks the river JJhelum flowing by the side of Jammu – Srinagar highway. The site still retains the ancient name, 'Avantipur'. History:           King 'Avantivarman' of Utpala dynasty founded the ancient town 'Avantipur' in A.D. 853 – 883. Kalhana in Rajatarangni states that this place was already a sacred center before the town was christened after Avantivarman. At Avantipur itself, Avantivarman built magnificent temples, dedicated to Lord Vishnu called 'Avantiswami' and other to Lord Siva c...

ग्यारसपुर विदिशा जिले

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 ग्यारसपुर विदिशा जिले में ग्यारसपुर तहसील विदिशा से उत्तर-पूर्व में 38 किमी दूर भोपाल सागर राजमार्ग पर स्थित है जो कि बौद्ध, ब्राम्हण तथा जैन धर्म का मध्यकालीन युग का ऐताहासिक और महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। माला देवी का हिन्दू मंदिर 9वी शताब्दी में जो कि उॅचाई पर स्थित पहाड़ की चटटानों को काटकर बनाया गया है। और जिस पहाड़ को काटकर बनाया गया है उसके अवशेष आज भी विद्यमान है। मंदिर से नीचे घाटी मे देखा जा सकता है। गिरीपाश्र्व से काटे गये एक चबूतरे पर अव्यवस्थित तथा एक विशाल प्रतिधार दीवार द्वारा सुदृढ़ीकृत माला देवी मंदिर वस्तुतः एक ही चित्ताकर्षक तथा विलक्षण भवन है उसमें एक प्रवेश मंडप, एक प्रशाल तथा एक देव मंदिर है। वह एक प्रदक्षिणा-पथ से घिरा हुआ है और उस पर एक उॅचा शिखर है जो कि उत्कृष्ट नक्काशी से युक्त है। यद्पि अब देव मंदिर कक्ष तथा प्रशाल में जैन प्रतिमायें विराजमान है, तथापि बाहरी द्वार चैखट के समपर्ण प्रखंड में बनी हुई एक देवी की मूर्ति तथा अन्य सजावटी मूर्तिया संभवतः यह दर्शाता है कि मूलतः यह मंदिर किसी देवी को समर्प...

तेवर (प्राचीन नाम त्रिपुरी या त्रिपुर)जबलपुर

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तेवर (प्राचीन नाम त्रिपुरी या त्रिपुर) जबलपुर शहर से 12 किलोमीटर दूर जबलपुर-भेड़ाघाट सड़क मार्ग पर तेवर गांव स्थित है। जिसका प्राचीन नाम त्रिपुरी है। जिसका उल्लेख महाभारत तथा अनेक पुराणों, जैन और बौद्ध धर्म के ग्रंथों में मिलता है। अभी भी बीच गांव मंे त्रिपुरेश्वर महादेव की मूर्ति विद्यमान है। उत्खन्न में प्रागेतिहासिक काल ईसा पूर्व लगभग 1000 वर्ष के मानव सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुये है। कलचुरीकाल 825 ईसा से 1176 ईसा के दौरान त्रिपुरी कलचुरी राजाओं की राजधानी रहा है। उत्खनन में प्राप्त मिट्टी के बर्तनांे, आभूषणों, औजारों, मकानों, घरों में उपस्थित कुओं के अवशेषों से यह दर्शित होता है कि वह पूर्व में समृद्धशाली नगर था। ईसा के पूर्व तीसरी शताब्दी के सिक्के में भी ब्राम्ही लिपि से त्रिपुरी नाम का उल्लेख मिलता है। 5 वीं शताब्दी के एक ताम्रपत्र के लेख मंे भी त्रिपुरी का नाम आता है। उस समय परिव्राजक महराजाओं का राज था तत्पश्चात् यह कलुचिरी राजाओं के हाथ चला गया। नागपुर के भोंसला राजा ने तेवर व अन्य चार गंाव एक महाराष्ट्रीय ब्राहम्ण को जागीर में दि...